
रामकुटी (Ramkuti)
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का रे मना हरिनाम न स्मरिसी पद श्री माणिक प्रभु महाराज स्वर श्रुति सडोलीकर
का रे मना हरिनाम न स्मरिसी पद श्री माणिक प्रभु महाराज स्वर श्रुति सडोलीकर संपर्क श्री माणिक प्रभू संस्थान फोन +919448469913 Website manikprabhu(.)org

S1 Ep 157मुखी वदावे भावे तुम्ही राम राम राम | स्वर छाया भालके
मुखी वदावे भावे तुम्ही राम राम राम | स्वर छाया भालके

S1 Ep 156ये ये श्रीरामा तव राज मंदिरी ये स्वर निलिमा वि. देव
गायिका -निलिमा वि. देव रचना -ह. भ. प. निवृत्त शिक्षिका -नीता कुलकर्णी पुल्लीवार, पुणे सौ निलिमा ताई यांना फोन करून अभिनंदन केलं.आणि हे राम गीत रामकुटी असावे असे सांगितल्यावर. त्यांनी परवानगी दिली आणि आमचा व्हॉट्स उप ग्रुप पण जॉईन केला धन्यवाद ताई

S1 Ep 155श्रीरामाष्टकम् -2 स्वर : सौ . वीणा शेट्ये
श्रीरामाष्टकम् ॐ श्रीरामचन्द्राय नमः ।अथ रामाष्टकम् ।श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।श्रीराम राम रणकर्कश राम रामश्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥ १॥श्रीराम राम दिविजेश्वर राम राम श्रीराम राम मनुजेश्वर राम राम ।श्रीराम राम जगदीश्वर राम राम श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥ २॥श्रीराम राम विबुधाश्रय राम राम श्रीराम राम जगदाश्रय राम राम ।श्रीराम राम कमलाश्रय राम राम श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥ ३॥श्रीराम राम गुणसागर राम राम श्रीराम राम गुणभूषण राम राम ।श्रीराम राम गुणभाजन राम राम श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥ ४॥श्रीराम राम शुभमङ्गल राम राम श्रीराम राम शुभलक्षण राम राम ।श्रीराम राम शुभदायक राम राम श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥ ५॥श्रीराम राम स्वजनप्रिय राम राम श्रीराम राम सुमुनिप्रिय राम राम ।श्रीराम राम सुकविप्रिय राम राम श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥ ६॥श्रीराम राम कमलाकर राम राम श्रीराम राम कमलेक्षण राम राम ।श्रीराम राम कमलाप्रिय राम राम श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥ ७॥श्रीराम राम दनुजान्तक राम राम श्रीराम राम दुरितान्तक राम राम ।श्रीराम राम नरकान्तक राम राम श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥ ८॥श्रीरामचन्द्रः स पुनातु नित्यं यन्नाममध्येन्द्रमणिं विधाय ।श्रीचन्द्रमुक्ताफलयोरुमायाश्चकार कण्ठाभरणं गिरीशः ॥ ९॥श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि ।श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ १०॥रामाष्टकमिदं पुण्यं प्रातःकाले तु यः पठेत् ।मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति ॥ इति श्रीरामाष्टकं सम्पूर्ण

श्री रामवरदायिनी स्तोत्र स्वर: आरती सदरजोशी
श्री रामवरदायिनी स्तोत्र स्वर: आरती सदरजोशी

श्रीरामद्वादशनामानि स्तोत्र स्वर सौ. शिल्पा की. मराठे
|| श्रीरामद्वादशनामस्तोत्रम् ||प्रथमं श्रीधरं विद्याद्द्वितीयं रघुनायकम् ।तृतीयं रामचन्द्रं च चतुर्थं रावणान्तकम् ॥ १॥पञ्चमं लोकपूज्यं च षष्ठमं जानकीपतिम् ।सप्तमं वासुदेवं च श्रीरामं चाष्टमं तथा ॥ २॥नवमं जलदश्यामं दशमं लक्ष्मणाग्रजम् ।एकादशं च गोविन्दं द्वादशं सेतुबन्धनम् ॥ ३॥द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छ्रद्धयान्वितः ।अर्धरात्रे तु द्वादश्यां कुष्ठदारिद्र्यनाशनम् ॥ ४॥अरण्ये चैव सङ्ग्रामे अग्नौ भयनिवारणम् ।ब्रह्महत्या सुरापानं गोहत्याऽऽदि निवारणम् ॥ ५॥सप्तवारं पठेन्नित्यं सर्वारिष्टनिवारणम् ।ग्रहणे च जले स्थित्वा नदीतीरे विशेषतः ।अश्वमेधशतं पुण्यं ब्रह्मलोके गमिष्यति ॥ ६॥इति श्री स्कन्दपुराणे उत्तरखण्डे श्रीउमामहेश्वरसंवादेश्रीरामद्वादशनामस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ।

Ep 152Wednesday -4-OCT-2023- Concert विठ्ठल कृष्ण
रामकुटी तील साधक

उमामहेश्वर स्तोत्र स्वर सौ कल्पना ताई देशपांडे
उमामहेश्वर स्तोत्र स्वर सौ कल्पना ताई देशपांडे

जय जय राम कृष्ण हरी स्वर कल्पना ताई देशपांडे
जय जय राम कृष्ण हरी स्वर कल्पना ताई देशपांडे

राम सर्वांगी सावळा ! स्वर सौ कल्पना ताई देशपांडे
राम सर्वांगी सावळा स्वर सौ कल्पना ताई देशपांडे

अविरत ओठी यावे नाम स्वर जोत्सनाताई जोशी
अविरत ओठी यावे नाम स्वर जोत्सनाताई जोशी

पितृअष्टक सौ सुविद्या ताई बिरेवार
पितृअष्टक जयांच्या कृपेने या कुळी जन्म झाला पुढे वारसा हा सदा वाढविला अश्या नम्र स्मरतो त्या पितरांना नमस्कार साष्टांग त्या पूर्वजांना ॥ १ ॥ इथे मान सन्मान सारा मिळाला पुढे मार्ग तो सदा दाखविला कृपा हिच सारी केली तयांना नमस्कार साष्टांग त्या पूर्वजांना ॥ २॥ मिळो सद् गती मज पितरांना विनंती हिच माझी त्रिदेवतांना कृती कर्म माझ्या मिळो मोक्ष त्यांना नमस्कार साष्टांग त्या पूर्वजांना ॥ ३॥ ....

S1 Ep 147Wednesday विठ्ठल - रामकुटी concert
भीमरूपी महरुद्र - लीलावतीताई विठुचा गजर हरिनामाचा झेंडा रोविला - सौ कल्पना ताई देशपांडे रखुमाई रुसली कोपऱ्यात बसली - लीलावती ताई रामकृपा कर विठ्ठल - कु आऱ्या वडाळकर मला विठठलचे पदी - कोमल ताई सपकाळ सुंदर ते ध्यान !- सौ कोमल ताई सपकाळ डोळे मोडीत राधा चाले ! सौ कल्पना देशपांडे देव घरा आला सौ कोमल ताई सपकाळ

राम आरती स्वर आणि रचना आरती सदरजोशी
*रामनवमी निमित्त स्वरचित कविता- आरती सदरजोशी* राम तो तारक। जोडी सोयरीक। आवरी घातक। सुख ते ऐहीक।१। रामनाम गाता। रामरूप झाले। तुझसी सर्वथा । एकरूप झाले।२। तुझिया नामाचा। लागलासे छंद। तुझिया भक्तीचा। अविट आनंद।३। नाही खेद मोद। होता निंदा स्तुति। राहीली अभेद। माझी आत्मस्थिती।४। राघव श्रीराम। भक्तांचा कैवारी। जन्मजन्मांतरी। बैसला अंतरी।५। तुझिया स्वाधिन। झाले मी संपूर्ण। काया वाचा मन। तुझसी अर्पण।६।<br/

दत्त माझा अवधूत बम्हचारी स्वर आरती ताई सदर जोशी.
दत्त माझा अवधूत बम्हचारी स्वर आरती ताई सदर जोशी.

महाविष्णुस्तोत्रम् गरुडगमण स्वर सौ सूविद्या बिरेवार
महाविष्णुस्तोत्रम् गरुडगमण स्वर सौ सुविद्या बिरेवार

S1 Ep 142अंबा मंगलं जय जगदंबा मंगलं |सौ कल्पनाताई देशपांडे
अंबा मंगलं जय जगदंबा मंगलं |सौ कल्पनाताई देशपांडे

योगी पावन मनाचा सौ कोमलताई सपकाळ
योगी पावन मनाचा सौ कोमलताई सपकाळ

गोपीगीत डॉ.संगीताताई फुलसुंदर
गोपीगीत डॉ.संगीताताई फुलसुंदर

रामनाम ज्याचे मुखी ! स्वर सौ रेखाताई देशपांडे
रामनाम ज्याचे मुखी ! स्वर सौ रेखाताई देशपांडे

S1 Ep 138मला तो आवडला श्रीराम | स्वर - आरती सदरजोशी | रचना - आरती सदरजोशी
मला तो आवडला श्रीराम | स्वर - आरती सदरजोशी रचना - आरती सदरजोशी

S1 Ep 137दिन हाक ऐकोनी प्रेम दाटले मनी स्वर आरती सदरजोशी
दिन हाक एकोणी प्रेम दाटले मनी स्वर आरती सदरजोशी

S1 Ep 136दास रामाचा हनुमान नाचे स्वर सौ . रेखा देशपांडे
दास रामाचा हनुमान नाचे स्वर सौ . रेखा देशपांडे

S1 Ep 135प्रभु राम ने दर्शन द्यावे स्वर ज्योत्स्ना जोशी .
प्रभु राम ने दर्शन द्यावे स्वर ज्योत्स्ना जोशी

श्री राम पंचरत्नं स्वर:सौ अर्चना ताई मालवणकर
श्री राम पंचरत्नं स्वर:सौ अर्चना ताई मालवणकर

आई जगदंबा कुमारी आर्या वडाळकर
आई जगदंबा कुमारी आर्या वडाळकर

श्रीराम जय राम बोला सौ कल्पना ताई देशपांडे
श्रीराम जय राम बोला सौ कल्पना ताई देशपांडे

जिवती
कोणी म्हटलेलं आहे माहीत नाही. आपणास विनंती करतो की कृपया [email protected] ला कळवावे

चल ग सखे लेवू या ग रामनाम रंगे ही साडी / स्वर: कल्पना ताई देशपांडे
चल ग सखे रामनाम रंगे ही साडी स्वर: कल्पना ताई देशपांडे

महागणेशपंचरत्न स्तोत्रं स्वर:सौ.शोभा प्रभाकर मानकर.
गणेशपंचरत्न स्तोत्रं स्वर:सौ.शोभा प्रभाकर मानकर.

.जातो माघारी पंढरीनाथा सौ ज्योत्स्नाताई जोशी
.जातो माघारी पंढरीनाथा सौ ज्योत्स्नाताई जोशी

आम्ही विठ्ठलाचे वारकरी सौ कल्पनाताई देशपांडे
आम्ही विठ्ठलाचे वारकरी सौ कल्पनाताई देशपांडे

श्रीरंग मागतो लोणी सौ.कल्पना देशपांडे
श्रीरंग मागतो लोणी सौ.कल्पना देशपांडे

S1 Ep 125सूर्यकवचम स्तोत्र | स्वर : कु आर्या वडाळकर
सूर्यकवचम:याज्ञवल्क्य उवाच-श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।शरीरारोग्दं दिव्यं सव सौभाग्य दायकम्।1।याज्ञवल्क्यजी बोले- हे मुनि श्रेष्ठ! सूर्य के शुभ कवच को सुनो, जो शरीर को आरोग्य देने वाला है तथा संपूर्ण दिव्य सौभाग्य को देने वाला है।देदीप्यमान मुकुटं स्फुरन्मकर कुण्डलम।ध्यात्वा सहस्त्रं किरणं स्तोत्र मेततु दीरयेत् ।2।चमकते हुए मुकुट वाले डोलते हुए मकराकृत कुंडल वाले हजार किरण (सूर्य) को ध्यान करके यह स्तोत्र प्रारंभ करें।शिरों में भास्कर: पातु ललाट मेडमित दुति:।नेत्रे दिनमणि: पातु श्रवणे वासरेश्वर: ।3।मेरे सिर की रक्षा भास्कर करें, अपरिमित कांति वाले ललाट की रक्षा करें। नेत्र (आंखों) की रक्षा दिनमणि करें तथा कान की रक्षा दिन के ईश्वर करें।ध्राणं धर्मं धृणि: पातु वदनं वेद वाहन:।जिव्हां में मानद: पातु कण्ठं में सुर वन्दित: ।4।मेरी नाक की रक्षा धर्मघृणि, मुख की रक्षा देववंदित, जिव्हा की रक्षा मानद् तथा कंठ की रक्षा देव वंदित करें।सूर्य रक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके।दधाति य: करे तस्य वशगा: सर्व सिद्धय: ।5।सूर्य रक्षात्मक इस स्तोत्र को भोजपत्र में लिखकर जो हाथ में धारण करता है तो संपूर्ण सिद्धियां उसके वश में होती हैं।सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योधिते स्वस्थ: मानस:।सरोग मुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विदंति ।6।स्नान करके जो कोई स्वच्छ चित्त से कवच पाठ करता है वह रोग से मुक्त हो जाता है, दीर्घायु होता है, सुख तथा यश प्राप्त होता है

नर्मदा अष्टकम् स्वर: सौअर्चना मालवणकर
नर्मदा अष्टकम् स्वर: सौअर्चना मालवणकर

S1 Ep 123रामाष्टक /स्वर :सौ रत्नमाला ताई
श्री राम अष्टकम भजे विशेषसुन्दरं समस्तपापखण्डनम् ।स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव राममद्वयम् ॥ १ ॥जटाकलापशोभितं समस्तपापनाशकं । स्वभक्तभीतिभञ्जनं भजे ह राममद्वयम् ॥ २ ॥ निजस्वरूपबोधकं कृपाकरं भवापहम् । समं शिवं निरञ्जनं भजे ह राममद्वयम् ॥ ३ ॥सहप्रपञ्चकल्पितं ह्यनामरूपवास्तवम् । निराकृतिं निरामयं भजे ह राममद्वयम् ॥ ४ ॥निष्प्रपञ्चनिर्विकल्पनिर्मलं निरामयम् । चिदेकरूपसन्ततं भजे ह राममद्वयम् ॥ ५ ॥ भवाब्धिपोतरूपकं ह्यशेषदेहकल्पितम् । गुणाकरं कृपाकरं भजे ह राममद्वयम् ॥ ६ ॥महावाक्यबोधकैर्विराजमानवाक्पदैः । परं ब्रह्मसद्व्यापकं भजे ह राममद्वयम् ॥ ७ ॥ शिवप्रदं सुखप्रदं भवच्छिदं भ्रमापहम् । विराजमानदेशिकं भजे ह राममद्वयम् ॥ ८ ॥रामाष्टकं पठति यस्सुखदं सुपुण्यं । व्यासेन भाषितमिदं शृणुते मनुष्यः ॥ ९ ॥विद्यां श्रियं विपुलसौख्यमनन्तकीर्तिं । संप्राप्य देहविलये लभते च मोक्षम् ॥ १० ॥

कल्याण करी रामराया /स्वर:सौ प्राजक्ता वडाळकर
कल्याण करी रामराया सौ प्राजक्ता वडाळकर

पुरुषोत्तम अष्टक स्वर: सुनिता ताई चव्हाण
पुरुषोत्तम अष्टक स्वर: सुनिता ताई चव्हाण

लाल मेरी सुरंग चूनरी भींजे। स्वर सेवा: *किशोरी दासी (अंजुना जी)
*जय गौर हरि* *लाल मेरी सुरंग चूनरी भींजे।* लेहु बचाय आप पिय मोकों बूंद परे रंग छीजे। बरखत मेह रहे नहीं नेंक हु कहा उपाय अब कीजे। हम तुम कुंजभवन में चलिये मान सबे सुख लीजे।।2।। ऐसो समयो बोहोर न व्हे हे मेरो कह्यो पतीजे। श्रीविट्ठल गिरिधरन छबीले निरख-निरख मुख जीजे।।3।। स्वर सेवा: *किशोरी दासी (अंजुना जी)*

योगी पावन मनाचा .. सौ.कोमल ताई.
हा अभंग अर्धवटच आहे कारण ताईंना खूप गहिवरून आले. पण भाव महत्वाचा ... आपल्या साठी सादर...,.

अच्युताष्टकम् सौ सुनिता ताई चव्हाण
अच्युताष्टकम्

विष्णुष्टपदी स्तोत्र सौ सुनीताताई चव्हाण
विष्णुषट्पदी स्तोत्र सौ सुनीताताई चव्हाण

मैं कैसे आऊ बुंधन मे भिगे मोरी सारी स्वर सेवा: *किशोरी दासी (अंजुना जी)*
*सावन का पद* मैं कैसे आऊँ बूंदन भीगे मोरी सारी कैसे आऊँ कैसे आऊँ कैसे आऊँ कैसे आऊँ इक घन गरजे,दूजे पवन झकोरे तीजे यमुना जल भारी... इक गोरी दूजे,दधि की मटुकिया तीजे रैन अंधियारी.. सूरदास प्रभु,बेसर उरझी ललन आये सम्वारी मैं कैसे आऊँ बूंदन भीगे मोरी सारी स्वर सेवा: *किशोरी दासी (अंजुना जी)*

Ep 115आधिक मासचे महत्व -सौ मेघा ताई
आधिक मासचे महत्व -सौ मेघा ताई

तेरी बाट निहारे राधा
जय गौर हरि तेरी बाट निहारे राधा साँवरिया आजा रे आजा साँवरिया आजा! सिर पर है गोरस की मटकी तेरे दरस हित पथ में अटकी आजा ओ चित चोर कन्हाई ठाड़ी तेरी गुजरिया। बार बार यमुना तट जावे आ वे मोहन दरस दिखा वे घर से यमुना यमुना से घर डोले बीच डगरिया। चढ़ी अटरिया काग उड़ावे प्रेम पुजारिन बलि बलि जावे खान पान पहरान भूल गई लागी तोसे नजरिया। दरस दीवानी सुधि बुधि खोके नयन गँवाये रही रो-रो के

राधा रानी मत जयिओ दूर
जय गौर हरि श्री राधा रानी मत जइयो तुम दूर मेरी महारानी मत जइयो तुम दूर तुम हो परम उदार लाडली कर दो क्ष्यमा कसूर श्री राधा रानी मत जइयो तुम दूर मेरी महारानी मत जइयो तुम दूर एक दर्श की आस स्वामिनी बरसाने में आई तेरी किरपा कोर से दिल में स्वामिनी बजने लगी शहनाई उसी किरपा की एक नज़र से करती रहो महसूस श्री राधा रानी मत जइयो तुम दूर मेरी महारानी मत जइयो तुम दूर तुम तो मेरी भोरी स्वामिनी में विषयन की मारी पतित उधारत हे द

पीठ से पीठ मिलाये बैठे हैं. स्वर सेवा: किशोरी दासी (अंजुना जी)
*जय गौर हरि* पीठ से पीठ लगाइ खड़े, वह बाँसुरी मन्द बजाय रहे हैं। सौभाग्य कहूँ उस धेनु के क्या, खुद श्याम जिसे सहलाय रहे हैँ। बछड़ा यदि कूद के दूर गयौ, पुचकार उसे बहलाय रहे हैं। गोविंद वही,बृजचंद्र वही, गोपाल वही कहलाय रहे हैं॥ स्वर सेवा: *किशोरी दासी (अंजुना जी)*

मैं बॅॉके की बॉंकी बन गयी स्वर सेवा: दासी अंजुना जी
मैं बॅॉके की बॉंकी बन गयी स्वर सेवा: दासी अंजुना जीबाँके पी से.....मैं बाँके की बाँकी बन गई बाँका बन गया मेराबड़े भाग्य से मिले रंगीले-बाँके रसिक बिहारीपरम् सुहाग ..सौन्दर्य सींव वे-अद्भुत प्रेम पुजारी!श्यामल घन की नित्य चातकी.. उनसे सर्वस्व मेरामैं बाँके की बाँकी बन गई बाँका बन गया मेरा मेरी उनकी प्रीत पुरानीजन्म-जन्म की दासीउन्हीं में नित जीती बसती,फिर भी रहती प्यासी?प्यास उसी चिर संगी कीवह नित्य अभीप्सत मेरा!मैं बाँके की बाँकी बन गई बाँका बन गया मेरा "अग-जग", "इह-पर",बलि हो गए-उन पर ही अनजानेमैं अनजान...सदा सब जानें-प्रीतम परम् सयानेअपनी मंगल कृपा कोर से कर्ष लिया सब मेरा!मैं बाँके की बाँकी बन गई बाँका बन गया मेरा

दत्त दिगंबर दैवत माझे श्री रवी देशपांडे.
दत्त दिगंबर दैवत माझे श्री रवी देशपांडे.

राधा कृष्णा वर भाळली सौ नेहा उपासनी
राधा कृष्णा वर भाळली सौ नेहा उपासनी