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मैं बॅॉके की बॉंकी बन गयी स्वर सेवा: दासी अंजुना जी

मैं बॅॉके की बॉंकी बन गयी स्वर सेवा: दासी अंजुना जी

रामकुटी (Ramkuti)

June 24, 20234m 52s

Show Notes

मैं बॅॉके की बॉंकी बन गयी

स्वर सेवा: दासी अंजुना जी


बाँके पी से.....


मैं बाँके की बाँकी बन गई 

बाँका बन गया मेरा


बड़े भाग्य से मिले रंगीले-

बाँके रसिक बिहारी


परम् सुहाग ..सौन्दर्य सींव वे-

अद्भुत प्रेम पुजारी!


श्यामल घन की नित्य चातकी.. 

उनसे सर्वस्व मेरा


मैं बाँके की बाँकी बन गई 

बाँका बन गया मेरा 


मेरी उनकी प्रीत पुरानी

जन्म-जन्म की दासी


उन्हीं में नित जीती बसती,

फिर भी रहती प्यासी?


प्यास उसी चिर संगी की

वह नित्य अभीप्सत मेरा!


मैं बाँके की बाँकी बन गई 

बाँका बन गया मेरा 


"अग-जग", "इह-पर",

बलि हो गए-

उन पर ही अनजाने


मैं अनजान...सदा सब जानें-

प्रीतम परम् सयाने


अपनी मंगल कृपा कोर से 

कर्ष लिया सब मेरा!


मैं बाँके की बाँकी बन गई 

बाँका बन गया मेरा