
Season 1 · Episode 8
अश्वमेध यज्ञ की तैयारी कैसे हुई?
उन दिनों प्रकृति को देवी देवताओं की तरह पूजा जाता था। उनसे यज्ञों, मंत्रो और ध्यान के ज़रिये communicate यानी संचार किया जाता था। अकाल पढ़ने पर वरुण देवता की पूजा की जाती थी। अधिक बारिश होने पर इंद्रा देव को पूजा जाता था। राज्य की सीमाओं को बढ़ने के लिए, अपनी शक्ति का परिमाण देने के लिए या संतान के लिए अश्वमेध यज्ञ कराया जाता था। अश्व यानी घोड़ा। एक वर्ष के लिए इस घोड़े को पास पड़ोस के राज्यों में भर्मण करने के लिए खुला छोड़ दिया जाता था। फिर? फिर क्या हुआ आप खुद ही सुन लीजिये। Tune in to this episode now.
Ramayan Aaj ke Liye with Kavita Paudwal · HT Smartcast Originals
October 5, 202210m 21s
Show Notes
उन दिनों प्रकृति को देवी देवताओं की तरह पूजा जाता था। उनसे यज्ञों, मंत्रो और ध्यान के ज़रिये communicate यानी संचार किया जाता था। अकाल पढ़ने पर वरुण देवता की पूजा की जाती थी। अधिक बारिश होने पर इंद्रा देव को पूजा जाता था। राज्य की सीमाओं को बढ़ने के लिए, अपनी शक्ति का परिमाण देने के लिए या संतान के लिए अश्वमेध यज्ञ कराया जाता था। अश्व यानी घोड़ा। एक वर्ष के लिए इस घोड़े को पास पड़ोस के राज्यों में भर्मण करने के लिए खुला छोड़ दिया जाता था। फिर? फिर क्या हुआ आप खुद ही सुन लीजिये। Tune in to this episode now.
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