
पान की दुकान संभालते-संभालते पिंटू पोहान ने लिख डाले हज़ारों लेख
कोलकाता निवासी पिंटू पोहान फुटपाथ पर एक छोटी सी पान की दुकान चलाते हैं, लेकिन उनकी लेखनी किसी प्रोफ़ेशनल लेखक से कम नहीं। पान बेचते-बेचते उन्होंने हजारों रचनाएं लिख डाली हैं — जिनमें उपन्यास, 200 से ज़्यादा कहानियां और कविताएं, गद्य-पद्य, फीचर, संपादकीय, पत्र, समाचार और पुस्तक समीक्षाएं शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब उन्होंने अपनी दुकान पर बैठकर ही रचा। आज उनकी किताबें स्वीडन के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाई जा रही हैं, जहां छात्र इनकी रचनाओं से बंगाली पढ़ना और लिखना सीख रहे हैं।
SBS Hindi · SBS Audio
July 15, 20259m 28sFULL
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Show Notes
कोलकाता निवासी पिंटू पोहान फुटपाथ पर एक छोटी सी पान की दुकान चलाते हैं, लेकिन उनकी लेखनी किसी प्रोफ़ेशनल लेखक से कम नहीं। पान बेचते-बेचते उन्होंने हजारों रचनाएं लिख डाली हैं — जिनमें उपन्यास, 200 से ज़्यादा कहानियां और कविताएं, गद्य-पद्य, फीचर, संपादकीय, पत्र, समाचार और पुस्तक समीक्षाएं शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब उन्होंने अपनी दुकान पर बैठकर ही रचा। आज उनकी किताबें स्वीडन के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाई जा रही हैं, जहां छात्र इनकी रचनाओं से बंगाली पढ़ना और लिखना सीख रहे हैं।