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Sheher | Amrita Pritam
Episode 105

Sheher | Amrita Pritam

Pratidin Ek Kavita

July 14, 20231m 54s

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Show Notes

शहर - अमृता प्रीतम

 

मेरा शहर एक लम्बी बहस की तरह है

सड़कें - बेतुकी दलीलों-सी…

और गलियाँ इस तरह

जैसे एक बात को कोई इधर घसीटता

कोई उधर

 

हर मकान एक मुट्ठी-सा भिंचा हुआ

दीवारें-किचकिचाती सी

और नालियाँ, ज्यों मुँह से झाग बहता है

 

यह बहस जाने सूरज से शुरू हुई थी

जो उसे देख कर यह और गरमाती

और हर द्वार के मुँह से

फिर साईकिलों और स्कूटरों के पहिये

गालियों की तरह निकलते

और घंटियाँ-हार्न एक दूसरे पर झपटते

 

जो भी बच्चा इस शहर में जनमता

पूछता कि किस बात पर यह बहस हो रही?

फिर उसका प्रश्न ही एक बहस बनता

बहस से निकलता, बहस में मिलता…

 

शंख घंटों के साँस सूखते

रात आती, फिर टपकती और चली जाती

 

पर नींद में भी बहस ख़तम न होती

मेरा शहर एक लम्बी बहस की तरह है….

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