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Namak | Anamika
Episode 125

Namak | Anamika

Pratidin Ek Kavita

August 5, 20232m 34s

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Show Notes

नमक - अनामिका


नमक दुख है धरती का और उसका स्वाद भी!

पृथ्वी का तीन भाग नमकीन पानी है

और आदमी का दिल नमक का पहाड़

कमज़ोर है दिल नमक का,

कितनी जल्दी पसीज जाता है!

गड़ जाता है शर्म से 

जब फेंकी जाती हैं थालियाँ

दाल में नमक कम या ज़रा तेज़ होने पर!

वो जो खड़े हैं न-

सरकारी दफ्तर-

शाही नमकदान हैं।

बड़ी नफ़ासत से छिड़क देते हैं हरदम

हमारे जले पर नमक!

जिनके चेहरे पर नमक है-

पूछिए उन औरतों से-

कितना भारी पड़ता है उनको

उनके चेहरे का नमक!

जिन्हे नमक की कीमत

करनी होती है अदा-

उन नमकहलालों से

रंज रहता   है महासागर।

दुनिया में होने न दीं उन्होंने क्रांतियाँ,

रहम खा गए दुश्मनों पर!

गाँधी जी जानते थे नमक की कीमत

और अमरूदों वाली मुनिया भी!

दुनिया में कुछ और रहे-न-रहे-

रहेगा नमक-

ईश्वर के आँसू और आदमी का पसीना-

ये ही वो नमक है कि जिससे 

थिराई रहेगी ये दुनिया।

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