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Main Jhukta Hun - Rajesh Joshi
Episode 5

Main Jhukta Hun - Rajesh Joshi

Pratidin Ek Kavita

April 8, 20232m 37s

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Show Notes

मैं झुकता हूँ - राजेश जोशी


राजेश जोशी साहित्य अकादमी पुरस्कृत कवि और साहित्यकार हैं। उनका जन्म 18 जुलाई 1946 को नरसिंहगढ़, मध्य प्रदेश में हुआ। प्रमुख कृतियों के लिए उन्हें शिखर सम्मान, पहल सम्मान, कैफ़ी आजमी सम्मान, शशि भूषण स्मृति नाट्य सम्मान आदि कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। 

दरवाज़े से बाहर जाने से पहले

अपने जूतों के तस्मे बाँधने के लिए मैं झुकता हूँ

रोटी का कौर तोड़ने और खाने के लिए

झुकता हूँ अपनी थाली पर

जेब से अचानक गिर गई क़लम या सिक्के को उठाने को

झुकता हूँ

झुकता हूँ लेकिन उस तरह नहीं

जैसे एक चापलूस की आत्मा झुकती है

किसी शक्तिशाली के सामने

जैसे लज्जित या अपमानित होकर झुकती हैं आँखें

झुकता हूँ

जैसे शब्दों को पढ़ने के लिए आँखें झुकती हैं

ताक़त और अधीनता की भाषा से बाहर भी होते हैं

शब्दों और क्रियाओं के कई अर्थ

झुकता हूँ

जैसे घुटना हमेशा पेट की तरफ़ ही मुड़ता है

यह कथन सिर्फ़ शरीर के नैसर्गिक गुणों

या अवगुणों को ही व्यक्त नहीं करता

कहावतें अर्थ से ज़्यादा अभिप्राय में निवास करती हैं।


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