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Lauta Main Is bade Sheher Me | Manglesh Dabral
Episode 238

Lauta Main Is bade Sheher Me | Manglesh Dabral

Pratidin Ek Kavita

November 25, 20232m 34s

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Show Notes

लौटा मैं इस बड़े शहर में | मंगलेश डबराल


इस बड़े शहर में रहता मैं 

एक आदमी अदना-सा था 

उस छोटे क़स्बे में गया तो पाया 

मेरा क़द बहुत बड़ा था


सभी देखते नज़र उठाकर 

मुझको किसी बड़ी-सी आशा में 

मैं भी पता नहीं क्या बोला उनसे 

भीषण भरकम भाषा में


वाह वाह कर सुनते थे मेरी कविता 

कहते थोड़ी और पीजिए 

बड़े शहर में जब हम आएँ 

कृपया थोड़ा समय दीजिए


मार्ग दिखाते रहें कहा उन्होंने 

नतमस्तक हो विदा समय 

चला वहाँ से मैं शर्मिन्दा 

लगा मुझे खुद से ही भय


फिर गया गाँव अपने तो देखा 

मुझसे लोग ज़रा सहमते थे

कैसा दुर्भाग्य मुझे वे

सबसे बड़ा मनुष्य समझते थे


तुम तो बड़े-बड़ों के संग

खाते-पीते खू़ब मजे़ से रहते होगे

इतनी अकल कमा ली तुमने 

हमें याद क्यों करते होगे 


बीस मिले बेरोज़गार कि छोटा-मोटा

काम कहीं दिलवाओ

दस वृद्धों ने कहा कि बेटा

ताक़त की बढ़िया दवा भिजवाओ


जल्दी ही कुछ करने अगली बार 

दवा लाने का आश्वासन देकर 

लौटा मैं इस बड़े शहर में

फिर से नीचा करने सिर।


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