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Hastakshep | Srikant Verma
Episode 154

Hastakshep | Srikant Verma

Pratidin Ek Kavita

September 2, 20232m 12s

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Show Notes

हस्तक्षेप | श्रीकांत वर्मा 

कोई छींकता तक नहीं

इस डर से

कि मगध की शांति

भंग न हो जाए,

मगध को बनाए रखना है तो

मगध में शांति

रहनी ही चाहिए


मगध है, तो शांति है

कोई चीख़ता तक नहीं

इस डर से

कि मगध की व्यवस्था में

दख़ल न पड़ जाए,

मगध में व्यवस्था रहनी ही चाहिए


मगध में न रही

तो कहाँ रहेगी?


क्या कहेंगे लोग?

लोगों का क्या?

लोग तो यह भी कहते हैं

मगध अब कहने को मगध है,

रहने को नहीं


कोई टोकता तक नहीं

इस डर से

कि मगध में

टोकने का रिवाज़ न बन जाए

एक बार शुरू होने पर


कहीं नहीं रुकता हस्तक्षेप—

वैसे तो मगध-निवासियो

कितना भी कतराओ

तुम बच नहीं सकते हस्तक्षेप से—

जब कोई नहीं करता

तब नगर के बीच से गुज़रता हुआ

मुर्दा

यह प्रश्न कर हस्तक्षेप करता है—

मनुष्य क्यों मरता है?


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