PLAY PODCASTS
Chidiyon Ko Pata Nahin | Bhagwat Rawat
Episode 196

Chidiyon Ko Pata Nahin | Bhagwat Rawat

Pratidin Ek Kavita

October 14, 20232m 24s

Audio is streamed directly from the publisher (media.transistor.fm) as published in their RSS feed. Play Podcasts does not host this file. Rights-holders can request removal through the copyright & takedown page.

Show Notes

चिड़ियों को पता नहीं | भगवत रावत

चिड़ियों को पता नहीं कि वे

कितनी तेज़ी से प्रवेश कर रही हैं

कविताओं में।

इन अपने दिनों में खासकर

उन्हें चहचहाना था

उड़ानें भरनी थीं

और घंटों गरदन में चोंच डाले

गुमसुम बैठकर

अपने अंडे सेने थे।

मैं देखता हूँ कि वे

अक्सर आती हैं

बेदर डरी हुईं

पंख फड़फड़ाती

आहत

या अक्सर मरी हुईं।

उन्हें नहीं पता था कि

कविताओं तक आते-आते

वे चिड़ियाँ नहीं रह जातीं,

वे नहीं जानतीं कि उनके भरोसे

कितना कुछ हो पा रहा है

और उनके रहते हुए

कितना कुछ ठहरा हुआ है।

अभी जब वे अचानक उड़ेंगीं

तो आसमान उतना नहीं रह जाएगा

और जब वे उतरेंगीं

तो पेड़ हवा हो जाएँगे।

मैं सारी चिड़ियों को इकट्ठा करके

उनकी ही बोली में कहना चाहता हूँ

कि यह बहुत अच्छा है

कि तुम्हें कुछ नहीं पता।

तुम हमेशा की तरह

कविताओं की परवाह किए बिना उड़ो

चहचहाओ

और बेखटके

आलमारी में रखी किताबों के ऊपर

घोंसले बनाकर

अपने अंडे सेओ।

न सही कविता में

पर हर रोज़

पेड़ से उतरकर

घर में

दो-चार बार

ज़रूर आओ-जाओ।


Topics

Hindi literaturepoetrydaily inspirationHindi poetssocietypeopleenvironment