
Audio is streamed directly from the publisher (media.transistor.fm) as published in their RSS feed. Play Podcasts does not host this file. Rights-holders can request removal through the copyright & takedown page.
Show Notes
अंतरिक्ष की सैर | त्रिलोक सिंह ठकुरेला
नभ के तारे कई देखकर
एक दिन बबलू बोला।
अंतरिक्ष की सैर करें माँ
ले आ उड़न खटोला॥
कितने प्यारे लगते हैं
ये आसमान के तारे।
कौतूहल पैदा करते हैं
मन में रोज हमारे॥
झिलमिल झिलमिल करते रहते
हर दिन हमें इशारे।
रोज भेज देते हैं हम तक
किरणों के हरकारे॥
कोई ग्रह तो होगा ऐसा
जिस पर होगी बस्ती।
माँ,बच्चों के साथ वहाँ
मैं खूब करुँगा मस्ती॥
वहाँ नये बच्चों से मिलकर
कितना सुख पाऊँगा।
नये खेल सिखूँगा मैं,
कुछ उनको सिखलाऊँगा॥
Topics
Hindi literaturepoetrydaily inspirationHindi poetssocietypeopleenvironment